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डायलिसिस के बारे में आप सभी को येसब पता होना चाहिए (In Hindi)

Dialysis

डायलिसिस क्या है? (What is Dialysis?)

डायलिसिस(Dialysis) रक्त से अपशिष्ट उत्पादों(Waste Product) और अतिरिक्त तरल(Fluid) पदार्थ को हटाने की एक प्रक्रिया है जब गुर्दे(Kidneys) ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। इसमें अक्सर रक्त को साफ करने के लिए मशीन में भेजना शामिल होता है।

आम तौर पर, गुर्दे(Kidneys) रक्त को फ़िल्टर करते हैं, हानिकारक अपशिष्ट उत्पादों(Harmful Waste Product) और अतिरिक्त तरल(Fluid) पदार्थ को हटाते हैं और इन्हें शरीर से बाहर निकालने के लिए मूत्र(Urine) में बदल देते हैं।

डायलिसिस क्यों किया जाता है?

यदि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है - उदाहरण के लिए, अगर आपको क्रोनिक किडनी रोग है तो किडनी रक्त को ठीक से साफ करने में सक्षम नहीं हो सकती है। वेस्टेज प्रॉडक्ट्स और फ्लूड प्रॉडक्ट्स आपके शरीर में खतरनाक स्तर तक जमा हो सकते हैं। उपचार न किए जाने पर, यह शरीर में कई घातक लक्षण पैदा कर सकता है। ऐसा होने से पहले डायलिसिस रक्त से वेस्टेज प्रॉडक्ट्स और फ्लूड प्रॉडक्ट्स को फ़िल्टर कर देता है।

डायलिसिस के प्रकार (Type of Dialysis)

  • हेमोडायलिसिस
  • पेरिटोनियल डायलिसिस

हेमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस में अंतर(Difference Between Hemodialysis and Peritoneal Dialysis)

हेमोडायलिसिस(Haemodialysis)

यह डायलिसिस का सबसे सामान्य रूप है। यह प्रक्रिया रक्त से दूषित पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालने के लिए एक कृत्रिम किडनी (हेमोडायलाइज़र) का उपयोग करती है। शरीर से रक्त निकालकर कृत्रिम किडनी द्वारा शुद्ध किया जाता है और फिर शुद्ध रक्त को डायलिसिस मशीन की सहायता से शरीर में वापस भेज दिया जाता है। रक्त को शुद्ध किया जाता है और शुद्ध रक्त रोगी को दिया जाता है; साथ ही शरीर में अतिरिक्त पानी का मूल्यांकन करके उस पानी को बाहर निकाला जाता है, जिससे मरीज के रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।

पेरिटोनियल डायलिसिस(Peritoneal Dialysis) :

इस प्रकार के पेरिटोनियल डायलिसिस (पीडी) में, कृत्रिम किडनी के बजाय शरीर के पेरिटोनियम को डायलाइज़र के रूप में उपयोग किया जाता है। पेट में एक ट्यूब डाली जाती है और उस ट्यूब के माध्यम से पानी पेट में डाला जाता है। इस पानी को छह घंटे तक रखा जाता है और फिर निकाल लिया जाता है. डायलीसेट या अंतःशिरा द्रव में मौजूद डेक्सट्रोज़ अशुद्धियों को बाहर निकालने में मदद करता है। इन पदार्थों को एक ट्यूब के माध्यम से एक संग्रह बैग में लाया जाता है और रोगी के रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है। पेरिटोनियल डायलिसिस की प्रक्रिया छह घंटे तक चलती है। इसमें सुधार किया गया है और इसे 'ऑटोमेटेड पेरिटोनियल डायलिसिस' कहा जाता है।

किस तरह की स्थितियों में डायलिसिस की जरुरत होतीहै?

किडनी रोग के प्रारंभिक चरण में, गोलियों, दवाओं, रक्तचाप को नियंत्रित करने, हीमोग्लोबिन बढ़ाने, सोडियम-पोटेशियम लवण को नियंत्रित करने और वजन नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। ये उपचार तब तक जारी रहते हैं जब तक मरीज की हालत काफी खराब न हो जाए। अगला चरण डायलिसिस है। लेकिन जब गुर्दे रक्त से अवांछित पदार्थों को निकालने में असमर्थ होते हैं और उनका कार्य प्रभावित होता है, तो डायलिसिस ही एकमात्र विकल्प होता है। ऐसे में किडनी का महत्वपूर्ण कार्य डायलिसिस के जरिए करना पड़ता है। डायलिसिस के माध्यम से शरीर से रक्त को निकालकर एक मशीन द्वारा शुद्ध किया जाता है, और फिर शुद्ध रक्त को डायलिसिस मशीन की सहायता से शरीर में वापस भेज दिया जाता है। रक्त से अशुद्धियाँ, अन्य लवण और अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है। किडनी फेल्योर वाले मरीजों के लिए डायलिसिस एक उपयुक्त प्रक्रिया है।

डायलिसिस सत्र की अवधि और आवश्यक विशेषताएँ(Duration of the Session and Essential Considerations)

आमतौर पर डायलिसिस सप्ताह में 3 बार किया जाता है और इसे करने में लगभग 4 घंटे लगते हैं। यह एक दिन की प्रक्रिया है जहाँ आपको उसी दिन छुट्टी मिल जाती है।
इसकी जरूरत जब पड़ती है तब किडनी क्षतिग्रस्त होने के कारण रक्त में विषाक्त पदार्थों, अम्ल-क्षारों और पानी की मात्रा का संतुलन नहीं बना पाती। बढ़े हुए पदार्थों की यह मात्रा शरीर के लिए प्राणघातक सिद्ध हो सकती है। इसी बात को ध्यान में रख कर विशेषज्ञ CKD के मरीजों के लिए डायलिसिस की प्रक्रिया को अपनाते हैं।।

डायलिसिस से पहले, दौरान और बाद में क्या होता है?

डायलिसिस पर रहने वाले कई लोगों का अच्छा जीवन जीने में सक्षम रहते है।

यदि आप ठीक हैं, तो आपको यह करने में सक्षम होते हो:

  • जॉब करना या पढ़ाई जारी रखना
  • गाड़ी चलाना
  • व्यायाम
  • स्विमिंग करना
  • छुट्टी पर जाना

अधिकांश लोग कई वर्षों तक डायलिसिस पर रह सकते हैं, हालांकि उपचार केवल किडनी के नुकसान की आंशिक भरपाई ही कर सकता है।

लेकिन पिछले दशक में डायलिसिस पर लोगों की जीवित रहने की दर में सुधार हुआ है और भविष्य में भी इसमें सुधार जारी रहने की उम्मीद है।

डायलिसिस के साथ जुड़े जोखिम (Risks Associated with Dialysis)

दोनों प्रकार के डायलिसिस दुष्प्रभाव के साथ आते हैं। यह निश्चित रूप से बताना भी मुश्किल हो सकता है कि क्या कोई लक्षण डायलिसिस के कारण है या किडनी की विफलता के कारण है जो शरीर को भी प्रभावित कर रहा है। कुछ सबसे आम दुष्प्रभाव जो लोग रिपोर्ट करते हैं उनमें शामिल हैं:

  • निम्न रक्तचाप
    यह तब हो सकता है जब डायलिसिस के दौरान रक्त से बहुत अधिक तरल पदार्थ निकाल दिया जाता है। इससे चक्कर आना, मतली , थकान और बेहोशी हो सकती है। निम्न रक्तचाप को रोकने के लिए , आपको डायलिसिस सत्रों के बीच अपने तरल पदार्थ का सेवन सीमित करना चाहिए, नमकीन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, और अपनी डायलिसिस टीम को वजन में किसी भी बदलाव की सूचना देनी चाहिए।
  • मांसपेशियों में ऐंठन
    यह तब हो सकता है जब डायलिसिस के कारण रक्त में इलेक्ट्रोलाइट्स (खनिज) का असंतुलन हो जाता है। इससे टांगों, पैरों या हाथों में दर्दनाक ऐंठन हो सकती है। मांसपेशियों में ऐंठन को रोकनेके लिए , आपको अपने निर्धारित आहार का पालन करना चाहिए, शराब और कैफीन से बचना चाहिए और डायलिसिस से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग करनी चाहिए।
  • संक्रमण
    ऐसा तब हो सकता है जब बैक्टीरिया एक्सेस साइट या कैथेटर के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं, या यदि पेरिटोनियल डायलिसिस के कारण पेरिटोनियम में सूजन हो जाती है। इससे बुखार, ठंड लगना, लालिमा, सूजन, दर्द या कैथेटर निकास स्थल पर मवाद हो सकता है।
  • खून की कमी
    एनीमिया के कारण कमजोरी, थकान, सांस लेने में तकलीफ और पीली त्वचा हो सकती है। एनीमिया गुर्दे की विफलता या हेमोडायलिसिस के दौरान रक्त की हानि के कारण हो सकता है।
  • त्वचा में खुजली
    यह तब हो सकता है जब गुर्दे की विफलता या अपर्याप्त डायलिसिस के कारण त्वचा में अपशिष्ट उत्पाद जमा हो जाते हैं। इससे सूखापन, पपड़ी बनना, दाने या रक्तस्राव हो सकता है।खुजली वाली त्वचा से राहत पाने के लिए, आपको गर्म शॉवर या स्नान से बचना चाहिए, हल्के साबुन और मॉइस्चराइज़र का उपयोग करना चाहिए, सूती या रेशम से बने ढीले-ढाले कपड़े पहनना चाहिए और खरोंचने से बचना चाहिए।

डायलिसिस के पेशेंट्स के लिए सही आहार क्यों महत्वपूर्ण है?

- डायलिसिस के दौरान सही भोजन करना सर्वोत्तम स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। अपने आहार विशेषज्ञ से एक ऐसी भोजन योजना के बारे में बात करें जो आपकी आहार संबंधी आवश्यकताओं और चिकित्सीय स्थिति को ध्यान में रखे।

क्या खाएँ:

  • अपने आहार में भरपूर मात्रा में ताजे फल और सब्जियां शामिल करें। फलों और सब्जियों में सोडियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस और प्रोटीन कम होते हैं जबकि आवश्यक विटामिन और खनिज मिलते हैं।
  • सोडियम या फास्फोरस पर अधिक भार डाले बिना आवश्यक मात्रा में प्रोटीन प्राप्त करने में मदद के लिए मछली, मुर्गी या अंडे जैसे दुबले प्रोटीन चुनें।
  • भूरे चावल और क्विनोआ जैसे साबुत अनाज की तलाश करें - ये अपने परिष्कृत समकक्षों की तुलना में अधिक फाइबर प्रदान करते हैं और आपको लंबे समय तक भरे रहने में भी मदद करेंगे।

क्या न खाएँ :

  • जहां तक ​​संभव हो प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचें; इनमें सोडियम की मात्रा अधिक होती है जो डायलिसिस रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके अतिरिक्त, प्रसंस्कृत स्नैक्स में महत्वपूर्ण विटामिन और खनिजों की कमी होती है, इसलिए इनसे पूरी तरह बचना ही सबसे अच्छा है।
  • डेयरी उत्पादों को सीमित करें, विशेष रूप से वे जिनमें वसा की मात्रा अधिक होती है; इन्हें संसाधित करना आपके शरीर के लिए कठिन हो सकता है और असुविधाजनक पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।
  • केले, एवोकाडो और खरबूजे जैसे उच्च पोटेशियम वाले खाद्य पदार्थों को ना कहें; संपूर्ण संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इन्हें केवल छोटे हिस्से में ही खाया जाना चाहिए।

डायलिसिस के खर्चे (Cost of Dialysis in India)

यदि आपकी किडनी की बीमारीशुरुआती चरण में है, तो डायलिसिस की सहायता से आपकी किडनी और आपकी जीवनशैली में सुधार किया जा सकता है। भारत में हेमोडायलिसिस कराने की लागत 12,000 से 15,000 रुपये प्रति माह के बीच हो सकती है। पेरिटोनियल डायलिसिस करने में 18,000 से 20,000 रुपये प्रति माह के बीच खर्च आ सकता है। अलग-अलग संस्थाओं के हिसाब खर्च में बदलाव हो सकते है। इसके अलावा डायलिसिस का खर्च देश से राज्य, राज्य से शहरों तक जाते-जाते भिन्न हो हो सकता है। इसका दूसरा विकल्प हैं सरकारी अस्पताल जोकि मुफ्त या बहुत ही कम कीमत पर डायलिसिस करते हैं लेकिन वहाँ पर मरीजों की संख्या कारण स्थिति विपरीत हो जाती है।